अमेरिका का दावा: होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के 16 जहाज नष्ट, तेहरान की चेतावनी— दुश्मनों तक नहीं पहुंचने देंगे तेल

अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संघर्ष के बीच अमेरिका ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने ईरान के माइन बिछाने वाले एक दर्जन से अधिक जहाजों को नष्ट कर दिया है। वहीं ईरान ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि वह क्षेत्र से होने वाले तेल निर्यात को रोक सकता है और अपने दुश्मनों तक एक लीटर तेल भी नहीं पहुंचने देगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 16 जहाज नष्ट करने का दावा
अमेरिकी सेना के अनुसार उसने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के 16 माइन बिछाने वाले जहाजों को नष्ट कर दिया है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अब तक ऐसी कोई पक्की रिपोर्ट नहीं है कि ईरान ने इस जलमार्ग में विस्फोटक बिछाए हैं। इसके बावजूद अमेरिकी सेना ने इन जहाजों को नष्ट करने का दावा किया है।
अमेरिकी सेना ने जारी किए वीडियो
अमेरिकी सेना ने अपने दावे के समर्थन में कुछ वीडियो भी जारी किए हैं, जिन्हें सार्वजनिक किया गया है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई उस समय की गई जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि उसने जलडमरूमध्य में बिछाए गए माइन तुरंत नहीं हटाए तो अमेरिका ऐसा हमला करेगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।
युद्ध के 11वें दिन बढ़ी बयानबाजी
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब 11वें दिन में पहुंच गया है और दोनों देशों के बीच बयानबाजी लगातार तीखी होती जा रही है।
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि इस युद्ध के सबसे बड़े और तेज हमले अभी बाकी हैं। वहीं पेंटागन ने बताया कि इस संघर्ष के दौरान अमेरिकी सैनिकों के घायल होने के कई मामले सामने आए हैं।
बातचीत से इनकार
इस युद्ध का असर पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में भी दिखाई देने लगा है। ईरान के नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे फिलहाल किसी भी तरह की बातचीत के लिए तैयार नहीं हैं।
इसके साथ ही ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ भी तीखे बयान दिए हैं और इजरायल तथा खाड़ी के कुछ अरब देशों के खिलाफ नए हमले शुरू करने की चेतावनी दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।
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