भारत-पाकिस्तान पर ट्रंप का दावा फिर चर्चा में, कांग्रेस ने उठाया मोदी की चुप्पी पर सवाल

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच ‘ऐतिहासिक सीजफायर’ करवाने का दावा दोहराया है। सऊदी अरब के रियाद में आयोजित सऊदी-अमेरिका निवेश फोरम में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने कहा कि उनके प्रशासन ने भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ती हिंसा को रोकने में अहम भूमिका निभाई और उन्होंने इसके लिए व्यापार को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया। ट्रंप के इस बयान पर अब भारत की राजनीति में हलचल मच गई है।
कांग्रेस का निशाना: “क्या प्रधानमंत्री को यह तुलना मंजूर है?”
कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने ट्रंप के बयान का एक वीडियो क्लिप शेयर करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति न सिर्फ भारत को पाकिस्तान के साथ जोड़ रहे हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से भी कर रहे हैं। खेड़ा ने कटाक्ष करते हुए पूछा कि क्या प्रधानमंत्री को यह तुलना स्वीकार है?
कांग्रेस नेताओं ने लगाए सवाल
प्रवीण चक्रवर्ती, जो ‘प्रोफेशनल्स कांग्रेस एंड डेटा एनालिटिक्स’ के प्रमुख हैं, ने तीखा हमला करते हुए कहा, “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री बराबर हैं। पाकिस्तान और भारत बराबर शक्तियां हैं। यह कोई और नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘अच्छे दोस्त’ डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं।”
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी ट्रंप के बयान को साझा करते हुए कहा, “यह कहानी तो किसी पाठ्यक्रम में भी नहीं थी।” उन्होंने सरकार पर कटाक्ष करते हुए ट्रंप की तुलना और दावों को भारत की विदेश नीति के लिए शर्मनाक बताया।
ट्रंप ने क्या कहा?
सऊदी अरब में दिए गए अपने संबोधन में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा:
“मेरी सबसे बड़ी उम्मीद शांतिदूत बनना और एकता लाना है। मुझे युद्ध पसंद नहीं है। वैसे, हमारे पास दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी सेना है। लेकिन कुछ ही दिन पहले, मेरे प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए ऐतिहासिक सीजफायर को सफलतापूर्वक करवाया।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्होंने इस समझौते को कराने के लिए व्यापार का सहारा लिया और दोनों देशों को समझौते के लिए राजी किया। ट्रंप के इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं। इस दौरान अरबपति उद्यमी एलन मस्क भी मंच पर मौजूद थे।
10 मई को हुआ था संघर्ष विराम
गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर चार दिनों तक ड्रोन और मिसाइल हमलों का आदान-प्रदान हुआ था, जिसके बाद 10 मई को दोनों देश संघर्ष समाप्त करने पर सहमत हुए थे। ट्रंप ने इसी घटनाक्रम को अपनी कूटनीतिक सफलता बताया है।
निष्कर्ष:
डोनाल्ड ट्रंप के दावे ने भारत की राजनीतिक बहस में एक बार फिर पाकिस्तान को घुसा दिया है। जहां कांग्रेस इसे भारत की विदेश नीति पर सवाल खड़ा करने वाला बयान बता रही है, वहीं सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब सबकी निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुख पर टिकी हैं कि क्या वे ट्रंप की इस तुलना और दावे को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करेंगे या खंडन करेंगे।
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