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दक्षिण अफ्रीका की सोने की खदान में त्रासदी 100 से अधिक खनिकों की भूख और प्यास से मौत

दक्षिण अफ्रीका के उत्तर-पश्चिमी प्रांत में एक बंद सोने की खदान में अवैध रूप से खनन कर रहे मजदूरों के लिए यह खदान कब्रगाह बन गई। खनिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह, माइनिंग अफेक्टेड कम्युनिटीज यूनाइटेड इन एक्शन ग्रुप (MACUA), के अनुसार, इस खदान में फंसे लगभग 100 खनिकों की भूख और प्यास से मौत हो गई है। खदान में मौतों का यह खुलासा तब हुआ, जब कुछ खनिकों ने एक वीडियो भेजकर मदद की गुहार लगाई। वीडियो में भूख-प्यास से तड़पते सैकड़ों मजदूरों की भयावह स्थिति सामने आई।

https://twitter.com/TabZLIVE/status/1878902672264143222

500 से अधिक खनिक अब भी फंसे
MACUA के प्रवक्ता सबेलो मंगुनी ने बताया कि खदान में अभी भी 500 से अधिक खनिक फंसे हुए हैं। शुक्रवार (10 जनवरी) को वीडियो सामने आने के बाद राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। अब तक 18 शवों को बाहर निकाला जा चुका है और 26 खनिकों को जीवित बचा लिया गया है। अधिकारियों और समुदाय की ओर से जारी बचाव अभियान में यह स्पष्ट हो गया कि खनिक महीनों से खदान में फंसे हुए थे, जिसके चलते उनकी मौत भूख और पानी की कमी से हुई।

बचाव अभियान और पुलिस की कार्रवाई
पुलिस प्रवक्ता ब्रिगेडियर सेबाटा मोकगवाबोन ने जानकारी दी कि बचाव अभियान सोमवार (13 जनवरी) को तेज कर दिया गया है। पुलिस और बचाव दल खनिकों के शव निकालने और बचे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर लाने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि खदान में कुल कितने खनिक फंसे हुए हैं।

अवैध खनन का काला सच
दक्षिण अफ्रीका के कई हिस्सों में अवैध खनन आम है। बंद की गई खदानों में अनौपचारिक खनिक, जिन्हें स्थानीय स्तर पर ‘जमाजामा’ कहा जाता है, अवैध रूप से प्रवेश कर बचे हुए खनिज भंडार निकालने की कोशिश करते हैं। यह काम न केवल खतरनाक है, बल्कि अक्सर घातक साबित होता है।

स्टिलफोंटेन के पास स्थित बफ़ेल्सफोंटेन गोल्ड माइन में इस समस्या ने गंभीर रूप ले लिया है। नवंबर से यहां पुलिस और अवैध खनिकों के बीच संघर्ष जारी है, जब अधिकारियों ने खदान को सील करने और खनिकों को बाहर निकालने का प्रयास किया।

खदानों में फंसे मजदूरों की दुर्दशा
बंद खदानों में प्रवेश करने वाले अवैध खनिक बेहद कठिन और असुरक्षित परिस्थितियों में काम करते हैं। इनके पास सुरक्षा उपकरणों की कमी होती है और वे अपनी जान जोखिम में डालकर खनिज निकालने का प्रयास करते हैं। खदानों में भूख, प्यास और गैस की कमी जैसी परिस्थितियां आम हैं, जिससे अक्सर जानलेवा हादसे होते हैं।

समाज और प्रशासन के लिए सबक
इस त्रासदी ने न केवल खनिकों की दुर्दशा को उजागर किया है, बल्कि अवैध खनन को रोकने और बंद खदानों की निगरानी के लिए सरकार की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं। यह घटना प्रशासन और समाज के लिए एक चेतावनी है कि बंद खदानों को सुरक्षित और सील करने की तत्काल आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

दक्षिण अफ्रीका की सोने की खदानों में खनन एक समय देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा था, लेकिन आज यही खदानें मजदूरों के लिए मौत का कारण बन रही हैं। यह त्रासदी न केवल एक मानवीय आपदा है, बल्कि यह दिखाती है कि सुरक्षा उपायों और नियामक व्यवस्था को मजबूत करना कितना जरूरी है।

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