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बिहार की सियासत में “दामाद आयोग” से शुरू हुई बहस, अब मुसलमान-दलित वोट बैंक पर पहुंची

बिहार की राजनीति एक बार फिर तेजस्वी यादव और जीतन राम मांझी के आमने-सामने आने से गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा “बिहार राज्य दामाद आयोग” को लेकर एआई आधारित वीडियो साझा किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री और ‘हम’ पार्टी प्रमुख जीतन राम मांझी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

तेजस्वी का कटाक्ष: “एनडीए का मतलब नेशनल दामाद आयोग”
तेजस्वी यादव ने 17 जून 2025 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक एआई वीडियो पोस्ट किया जिसमें उन्होंने कटाक्ष करते हुए लिखा,

“अगर आप किसी के जमाई हैं तो पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार द्वारा संरक्षित ‘बिहार राज्य दामाद आयोग’ में अप्लाई नहीं कर सकते, क्योंकि इसके सर्वाधिकार केवल ख़ास लोगों तक सीमित हैं। एनडीए यानी नेशनल दामाद आयोग में आपका भी अभिनंदन नहीं है!”

यह बयान इशारों-इशारों में उन रिश्तों पर तंज था, जिनकी चर्चा सत्ता पक्ष में अक्सर होती है, जहां नजदीकी रिश्तेदारों को सत्ता और पद का लाभ मिलते देखा जाता है।

मांझी का पलटवार: “अब दरी नहीं बिछाएंगे मुसलमान और दलित”
तेजस्वी यादव के इस पोस्ट पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने जवाबी हमला बोलते हुए विपक्ष पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने लिखा,

“बदला लेंगे, बदल देंगे, तोड़ेंगे आपका घमंड।”

इसके साथ ही मांझी ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल मुसलमानों के कंधों पर सियासत करता है, लेकिन असल फैसले और पद केवल यादव परिवार तक सीमित रहते हैं। उन्होंने आगे लिखा:

“वोट दें मुसलमान, राज करेंगे लालू यादव
वोट करें मुसलमान, नेता प्रतिपक्ष बनेंगे तेजस्वी यादव
वोट देंगे मुसलमान, राज्यसभा जाएंगी मीसा दीदी
बहस करेंगे मुसलमान, मंत्री बनेंगे तेज प्रताप”

रोहिणी आचार्य और राबड़ी देवी पर भी निशाना
मांझी ने सिंगापुर में रहने वाली लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा:

“विदेशों से आकर वोट करेंगे मुसलमान, सिंगापुर से आकर चुनाव लड़ेंगी रोहिणी आचार्य।
रैली में जाएंगे मुसलमान, विधान परिषद में नेता बनेंगी राबड़ी देवी।”

मांझी ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर कब तक तेजस्वी यादव और उनका परिवार मुसलमानों को “गुलाम” की तरह इस्तेमाल करता रहेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अब मुसलमान और दलित उनके लिए दरी नहीं बिछाएंगे।

क्या है सियासी मायने?
तेजस्वी यादव के व्यंग्यात्मक हमले के जवाब में मांझी का यह तीखा पलटवार साफ दर्शाता है कि बिहार की राजनीति जाति और धर्म आधारित समीकरणों पर एक बार फिर से केंद्रित होती जा रही है। “दामाद आयोग” जैसा प्रतीकात्मक तंज जहां सत्ता पक्ष पर परिवारवाद और भाई-भतीजावाद के आरोप लगाता है, वहीं मांझी का जवाब विपक्ष पर मुस्लिम और दलित वोट बैंक के ‘दोहरे इस्तेमाल’ का आरोप लगाता है।

निष्कर्ष:
बिहार में विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हों, लेकिन सियासी बिसात बिछ चुकी है। तेजस्वी और मांझी के बीच यह तीखा शब्द-युद्ध आने वाले समय में और भी कई मुद्दों को हवा दे सकता है। जहां एक ओर विपक्ष सत्ता पक्ष को परिवारवाद और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर घेर रहा है, वहीं एनडीए नेता विपक्ष की ‘संकीर्ण वोट बैंक राजनीति’ को उजागर करने की कोशिश कर रहे हैं।

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