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संजय कपूर की मौत के बाद उत्तराधिकार विवाद, वसीयत की सच्चाई पर उठ रहे सवाल

दिल्ली उच्च न्यायालय में इस समय देश की सबसे बड़ी उत्तराधिकार लड़ाइयों में से एक पर सबकी नज़रें टिकी हैं। दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की लगभग ₹30,000 करोड़ की संपत्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। संजय कपूर के बच्चे—20 वर्षीय समायरा और 15 वर्षीय कियान—अपनी मां करिश्मा कपूर के माध्यम से अदालत का दरवाज़ा खटखटा चुके हैं। उनका आरोप है कि संजय कपूर की कथित वसीयत, जो उनके निधन के सात सप्ताह बाद सामने आई, न केवल छिपाई गई बल्कि उसमें जालसाज़ी भी की गई है। पहले उन्हें विश्वास दिलाया गया था कि कोई वसीयत मौजूद नहीं है, लेकिन अब इस दस्तावेज़ ने परिवार के भीतर और अदालत के सामने बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

ट्रस्ट से ऊपर वसीयत 

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं करिश्मा कपूर के बच्चों के कानूनी सलाहकार, महेश जेठमलानी का कहना है कि ये क़ानूनी लड़ाई ट्रस्ट से मिलने वाले फ़ायदों के लिए नहीं है, बल्कि यह बच्चों को उनके स्वर्गीय पिता की निजी संपत्तियों में उनके उत्तराधिकार का जायज़ हक़ दिलाने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए है। श्री जेठमलानी ने कहा, यह मुक़दमा संजय कपूर के बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने और देशविदेश में मौजूद उनकी संपत्तियों में बच्चों का सही हिस्सा सुनिश्चित करने के लिए है।” 

मार्च 2025 की एक वसीयत ही इस मामले की जड़ है, जिसके अनुसार स्वर्गीय संजय कपूर ने कथित तौर पर अपनी सारी निजी संपत्ति अपनी तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव के नाम कर दी है। हालाँकि, कथित वसीयत न तो पंजीकृत है और न ही क़ानूनी रूप से प्रमाणित कराया गया है और बच्चों से पूछने पर उससे इनकार कर दिया गया। इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद, कथित वसीयत के साथ-साथ 12 जून, 2025 तक की संजय कपूर की संपत्तियों की पूरी सूची का खुलासा किया जाना है। 

संजय कपूर के बच्चों को दिए गए 1,900 करोड़ का सवाल

दूसरी ओर, प्रिया सचदेव कपूर के वकील ने दिल्ली उच्च न्यायालय में दावा किया कि बच्चों को आर.के. फैमिली ट्रस्ट के ज़रिये पहले ही ₹1,900 करोड़ मिल चुके हैं। हालाँकि, सूत्रों के हवाले से ये पता चला है कि यह रकम सोना कॉमस्टार के शेयरों के मूल्य पर आधारित है और बच्चों को अभी तक वे शेयर नहीं मिले हैं, जो अब भी ट्रस्ट के पास हैं। ट्रस्ट के पास मौजूद इन संपत्तियों का नियंत्रण अभी भी प्रिया सचदेव कपूर के पास है, और ये बच्चों की पहुँच के बाहर है।  

इस मामले के हर पहलू पर गौर करते हुए, महेश जेठमलानी ने कहा, “अगर मान भी लें कि पूरी संपत्ति ₹30,000 करोड़ की है और बच्चों को कथित तौर पर आर.के. ट्रस्ट से ₹1,900 करोड़ मिल गए हैं, फिर भी प्रिया सचदेव कपूर को ₹28,000 करोड़ से ज़्यादा मिल रहा है। क्या वो उस संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा छोड़ देंगी? इस बात को समझना और स्वीकार करना ज़रूरी है कि, ये मुकदमा बस इतना सुनिश्चित करने के लिए है कि करिश्मा और स्वर्गीय संजय कपूर के दो बच्चों सहित सभी पाँच क्लास 1 वारिसों को इस संपत्ति में उनका जायज़ हक़ मिले।” 

अदालत की कार्यवाही से मिली जानकारी के मुताबिक, बच्चों को अभी तक न तो वसीयत की कॉपी दी गई है और न ही उन्हें अपने पिता की निजी संपत्तियों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी मिली है। इन घटनाक्रमों ने उत्तराधिकार से संबंधित विवादों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और बच्चों के हक़ को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं, और इस तरह के मुद्दों का दायरा सिर्फ एक परिवार तक ही सीमित नहीं हैं।

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