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भारत में शिक्षा क्रांति की ओर कदम: 15 अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय खोलेंगे कैंपस, STEMB क्षेत्रों पर रहेगा फोकस

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की कि इस शैक्षणिक सत्र में 15 अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय भारत में अपने कैंपस खोलने की तैयारी कर रहे हैं। इन संस्थानों का मुख्य फोकस STEMB क्षेत्रों यानी साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथेमैटिक्स और बायोमेडिकल साइंसेज पर होगा।

यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल को मिला LoI, बेंगलुरु में खुलेगा कैंपस
इस दिशा में एक बड़ा कदम तब देखने को मिला जब यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल को यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) की ओर से आधिकारिक रूप से लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) सौंपा गया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली में आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता स्वयं केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की।

बता दें कि यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल भारत में कैंपस खोलने की अनुमति पाने वाला दूसरा विदेशी संस्थान है। इससे पहले, यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन को 2023 में जारी UGC गाइडलाइंस के तहत LoI प्रदान किया गया था।

1881 में स्थापित और प्रतिष्ठित Russell Group का सदस्य यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल भारत में कैंपस शुरू करने की सार्वजनिक घोषणा करने वाला चौथा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय है।

NEP 2020 से ‘विकसित भारत 2047’ का सपना होगा साकार
मंत्री प्रधान ने इस पहल को “विकसित भारत 2047” की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के तहत भारत का लक्ष्य है कि वह वैश्विक स्तर पर उन्नत, समावेशी और भविष्य-उन्मुख शिक्षा प्रणाली को अपनाकर “वैश्विक नागरिकों” का निर्माण करे।

उद्योगों के साथ भी बढ़ेगा सहयोग
LoI कार्यक्रम के दौरान तीन प्रमुख समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते निम्नलिखित संस्थाओं के साथ किए गए:

  1. एस्ट्राजेनेका फार्मा इंडिया लिमिटेड
  2. YouWeCan फाउंडेशन
  3. ड्रीम11
  4. रॉयल कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियंस एंड गायनकोलॉजिस्ट्स (RCOG)

इन साझेदारियों का उद्देश्य शिक्षा और उद्योग के बीच नवाचार को बढ़ावा देना और परस्पर लाभदायक सहयोग को प्रोत्साहित करना है।

UGC अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
UGC के अंतरिम चेयरमैन और उच्च शिक्षा सचिव वीनीत जोशी ने कहा कि यह LoI केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह भारत के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक गहरा परिवर्तन का संकेत है। उन्होंने कहा, “यह रणनीतिक सुधारों, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ठोस नीतिगत ढांचे पर आधारित व्यापक परिवर्तन की शुरुआत है।”

निष्कर्ष
विदेशी विश्वविद्यालयों की भारत में दिलचस्पी यह दर्शाती है कि देश की शिक्षा प्रणाली वैश्विक मानकों की ओर अग्रसर है। यह पहल न केवल छात्रों को वैश्विक स्तर की शिक्षा भारत में ही उपलब्ध कराएगी, बल्कि भारत को शिक्षा के क्षेत्र में एक अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाने के सपने को भी साकार करेगी।

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