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छह साल बाद चीन पहुंचे एस. जयशंकर, राष्ट्रपति शी जिनपिंग से की मुलाकात — भारत-चीन संबंधों में दिखी नई गर्माहट

बीजिंग में मंगलवार को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के विदेश मंत्रियों की बैठक के मौके पर हुई और यह जयशंकर की छह साल बाद चीन की पहली यात्रा थी। यह दौरा भारत और चीन के बीच धीरे-धीरे सामान्य होते संबंधों की पृष्ठभूमि में हुआ है।

शी जिनपिंग से शिष्टाचार भेंट

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा,

“आज सुबह बीजिंग में SCO के अपने अन्य विदेश मंत्री साथियों के साथ राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के शुभकामनाएं उन्हें प्रेषित कीं। भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हाल के विकास से अवगत कराया। इस दिशा में हमारे नेताओं के मार्गदर्शन को हम अत्यंत महत्व देते हैं।”

चीनी विदेश मंत्री वांग यी से व्यापक वार्ता

जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने पिछले नौ महीनों में सीमा विवाद को सुलझाने और शांति बनाए रखने के प्रयासों के चलते द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने में “अच्छी प्रगति” की है।

उन्होंने कहा,

“यह रणनीतिक विश्वास और रिश्तों के सुचारु विकास की आधारशिला है। अब हम पर यह ज़िम्मेदारी है कि हम सीमा से जुड़े अन्य पहलुओं जैसे डि-एस्केलेशन (तनाव घटाना) पर ध्यान दें।”

मोदी-शी कज़ान बैठक का ज़िक्र, संबंधों में नया दृष्टिकोण

जयशंकर ने पिछले साल कज़ान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात का हवाला देते हुए कहा कि उसके बाद से संबंधों में सकारात्मक दिशा दिखाई दी है। उन्होंने बीजिंग से “दूरदर्शी दृष्टिकोण” अपनाने की अपील की और कहा,

“भारत और चीन के बीच स्थिर और रचनात्मक संबंध न सिर्फ हमारे लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभकारी हैं। आपसी सम्मान, हित और संवेदनशीलता के आधार पर ही हम अपने संबंधों को आगे बढ़ा सकते हैं।”

उन्होंने यह भी दोहराया कि,

“हम पहले ही इस बात पर सहमत हो चुके हैं कि मतभेदों को विवाद नहीं बनाना चाहिए और प्रतिस्पर्धा को कभी टकराव में नहीं बदलना चाहिए।”

चीन के निर्यात प्रतिबंधों पर चिंता व्यक्त

चीन की ओर से लगाए गए कुछ व्यापार प्रतिबंधों को लेकर जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह के उपाय भारत के घरेलू विनिर्माण को प्रभावित कर सकते हैं।

“हमारी आपसी साझेदारी में व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बहाल करना अहम है। ऐसे में व्यापार में रुकावट और प्रतिबंधों से बचना जरूरी है।”

पर्यटन और कनेक्टिविटी पर सकारात्मक सहमति

दोनों देशों ने सीधे हवाई सेवाएं और कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा, सीमा-पार नदियों पर सहयोग बढ़ाने और हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा करने पर भी सहमति बनी।

SCO बैठक से पहले आतंकवाद पर कड़ा संदेश

SCO की बैठक से पहले जयशंकर ने आतंकवाद, अलगाववाद और चरमपंथ के खिलाफ संगठन के मूल उद्देश्य को रेखांकित किया। उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी को याद दिलाया कि,

“भारत को उम्मीद है कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को पूरी मजबूती से लागू किया जाएगा।”

लद्दाख गतिरोध के समाधान के बाद बढ़ता विश्वास

यह दौरा पूर्वी लद्दाख में लंबे समय से चले आ रहे सैन्य गतिरोध के समाधान की पृष्ठभूमि में हुआ, जो अक्टूबर 2023 में देपसांग और डेमचोक में विघटन (disengagement) के साथ समाप्त हुआ। इसके बाद ही कज़ान में मोदी-शी बैठक संभव हो सकी और उच्च स्तरीय संवाद फिर से शुरू हुआ। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी सितंबर में फिर से चीन की यात्रा करेंगे और SCO शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।

निष्कर्ष

एस. जयशंकर की यह यात्रा भारत-चीन संबंधों के नए अध्याय की ओर इशारा करती है। सीमा विवाद की पृष्ठभूमि में शांति की दिशा में उठे कदमों के साथ, व्यापार, कनेक्टिविटी और आपसी सम्मान की भावना से दोनों देशों के बीच संबंधों में स्थिरता और मजबूती की उम्मीद की जा रही है।

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