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नीरज चोपड़ा ने तोड़ा 90 मीटर का सपना, अब निगाहें हैं उससे आगे – एक नई शुरुआत

नीरज चोपड़ा ने आखिरकार वह कर दिखाया, जिसका भारत को वर्षों से इंतजार था। दोहा डायमंड लीग में उन्होंने भाला 90.23 मीटर दूर फेंककर न केवल अपना व्यक्तिगत लक्ष्य पूरा किया, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में भी एक नई इबारत लिख दी। यह कोई साधारण उपलब्धि नहीं थी—यह मानसिक और ऐतिहासिक दोनों स्तरों पर एक बड़ी बाधा को पार करना था।

हालांकि नीरज ने उस पल को किसी उत्सव की तरह नहीं मनाया। न कोई जोरदार चीख, न ही मुट्ठी तानने का जश्न। बस एक हल्की मुस्कान और सिर हिलाकर उन्होंने खुद को और अपने देश को राहत दी। वर्षों से जो सवाल उनका पीछा कर रहा था—”नीरज, 90 मीटर कब?”—अब वह सवाल अतीत बन चुका है।

25वां एथलीट, लेकिन भारत का पहला
नीरज अब दुनिया के उन केवल 25 पुरुषों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने भाले को 90 मीटर से आगे फेंका है। 2016 में अंडर-20 वर्ल्ड चैंपियनशिप में 86.48 मीटर की थ्रो के बाद ही वह भविष्य के सितारे माने जाने लगे थे। तब से उन्होंने ओलंपिक गोल्ड, वर्ल्ड चैंपियनशिप और डायमंड लीग जैसे तमाम खिताब जीत लिए थे। लेकिन 90 मीटर की दूरी अब तक उनकी पहुंच से बाहर थी।

“मैंने 88, 89 बार-बार फेंका था, लेकिन 90 नहीं हुआ था। अब, न सिर्फ मेरे लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए यह बोझ उतर गया है,” नीरज ने दोहा में रेवस्पोर्ट्ज़ से बातचीत में कहा।

जब सवाल नहीं पूछा गया, तब जवाब मिला
आयरनी यह रही कि दोहा डायमंड लीग से पहले की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहली बार 90 मीटर की चर्चा नहीं हुई। न ही कोच यान जेलेज़नी को लेकर, न ही भारत-पाक खेल तनावों को लेकर। लेकिन मैदान पर नीरज पूरी तैयारी के साथ आए। वार्मअप में ही उन्होंने 80 मीटर से आगे भाला फेंका और पहले ही प्रयास में 88.44 मीटर की विश्व-नेतृत्व वाली थ्रो की।

तीसरा प्रयास, जो इतिहास में दर्ज हो गया, वह नीरज के आत्मविश्वास का प्रमाण था। इस बार उन्होंने अपने फैंस को रैली किया, रन-अप लिया और जैसे ही भाला हवा में गया, नीरज को पता था—”यह वही थ्रो है।” उनकी बाहें ऊपर उठीं और थोड़ी देर बाद, स्कोरबोर्ड ने पुष्टि की: 90.23 मीटर।

खुशी अधूरी क्यों रही?
लेकिन कहानी में एक ट्विस्ट था। जर्मनी के जूलियन वेबर ने आखिरी राउंड में 91.06 मीटर की थ्रो कर नीरज को पछाड़ दिया। पहली बार 90 मीटर पार करने का सपना पूरा हुआ, लेकिन शीर्ष स्थान नहीं मिला।

नीरज को इस बात की चिंता नहीं थी। उनके लिए यह एक शुरुआत थी, अंत नहीं। “अब जब मैंने रास्ता देख लिया है, तो आगे जाना आसान होगा। मैं जानता हूं कि मैं और अच्छा कर सकता हूं। अब मेरा लक्ष्य 90 से ऊपर लगातार फेंकना है,” नीरज ने आत्मविश्वास से कहा।

नई कोचिंग, नया संतुलन
कोच यान जेलेज़नी के साथ यह नीरज का पहला सीज़न है। तकनीकी सुधार और फिटनेस में निखार ने असर दिखाया है। नीरज पहले से ज्यादा बैलेंस्ड और तेज दिखे। चोटों से मुक्त होकर अब वह मानसिक रूप से भी और मजबूत हो चुके हैं।

2025: विरासत की लड़ाई शुरू
अब निगाहें टोक्यो में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप पर हैं, जहां नीरज को अपने खिताब की रक्षा करनी है। पाकिस्तान के अर्शद नदीम पहले ही 92.97 मीटर की रिकॉर्ड थ्रो के साथ चुनौती पेश कर चुके हैं। वहीं जूलियन वेबर भी अब 90 मीटर क्लब में शामिल हो चुके हैं।

2025 की एथलेटिक्स सीज़न अब केवल मुकाबले की नहीं, विरासत की लड़ाई बन चुकी है। नीरज का लक्ष्य अब सिर्फ 90 नहीं—”अब मंज़िल उससे कहीं आगे है।”

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