HINDI NEWSटॉप न्यूज़

पीएम मोदी की ‘एक साल तक सोना न खरीदने’ की अपील पर देशभर में चर्चा, कारोबारियों और ग्राहकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने की अपील के बाद देशभर में सर्राफा बाजारों में बहस तेज हो गई है। प्रधानमंत्री ने यह अपील मध्य-पूर्व में जारी युद्ध, बढ़ते कच्चे तेल के दाम और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए की है। सरकार का मानना है कि अगर कुछ समय के लिए गोल्ड इम्पोर्ट कम किया जाए तो देश की आर्थिक स्थिति को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इस अपील के बाद आम लोगों, ज्वेलर्स और सर्राफा व्यापारियों की तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कहीं लोग इसे देशहित में सही कदम बता रहे हैं, तो कहीं व्यापारी इसे अपने कारोबार के लिए बड़ा खतरा मान रहे हैं।

शादी-विवाह की वजह से खरीद रहे हैं सोना

बाजार में खरीदारी करने पहुंचे कई ग्राहकों का कहना है कि वे सिर्फ शादी-विवाह और पारिवारिक रस्मों की वजह से सोना खरीद रहे हैं। लोगों का कहना है कि भारतीय परंपरा में शादी-ब्याह में सोने का विशेष महत्व है, इसलिए इसे पूरी तरह से नजरअंदाज करना आसान नहीं है।

कुछ ग्राहकों ने कहा कि वे प्रधानमंत्री की अपील का सम्मान करते हैं और जरूरत के अलावा सोना खरीदने से बचेंगे। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि अगर घर में शादी है तो सोना खरीदना मजबूरी भी है और परंपरा का हिस्सा भी।

मुंबई के सर्राफा बाजार में भी इसी तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई ग्राहकों ने कहा कि वे केवल आवश्यक खरीदारी कर रहे हैं और अनावश्यक रूप से गोल्ड में निवेश से बचेंगे। कुछ लोगों ने यह भी माना कि देशहित के लिए थोड़े समय तक संयम रखना गलत नहीं है।

आज यानी 13 मई 2026 को मुंबई में सोने की कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला। 24 कैरेट सोना आज लगभग ₹16,789 प्रति ग्राम पर पहुंच गया, जबकि एक दिन पहले इसकी कीमत करीब ₹15,398 प्रति ग्राम थी। यानी सिर्फ एक दिन में सोने के दाम में लगभग ₹1,391 प्रति ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव बढ़कर करीब ₹1,67,890 हो गया है, जो पिछले दिन ₹1,53,980 था। कीमतों में आई इस तेजी को लेकर बाजार में भी काफी चर्चा है और कई लोग बढ़ते दामों के बीच जरूरी खरीदारी ही कर रहे हैं।

कारोबारियों को कारोबार पर बड़े असर की चिंता

दूसरी तरफ सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री की इस अपील से उनके कारोबार पर 25 से 30 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है। व्यापारियों के अनुसार पिछले डेढ़ साल में ही गोल्ड और सिल्वर कारोबार में 15 से 20 प्रतिशत तक गिरावट आ चुकी है और अगर लोग खरीदारी कम कर देते हैं तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

लखनऊ के आशियाना इलाके में सोना-चांदी व्यापारियों ने विरोध स्वरूप कई दुकानों को बंद रखा। व्यापारियों का कहना है कि अगर एक साल तक लोग सोना नहीं खरीदेंगे तो लाखों व्यापारियों और उनके कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।

ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड फेडरेशन और लखनऊ सर्राफा एसोसिएशन से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि देशभर में लगभग 3 से 4 करोड़ लोग सीधे तौर पर इस व्यापार से जुड़े हैं। अगर कर्मचारियों और परिवारों को भी जोड़ दिया जाए तो करीब 10 से 12 करोड़ लोगों की आजीविका इस सेक्टर पर निर्भर करती है।

व्यापारियों ने यह भी कहा कि एक दुकान सिर्फ मालिक तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके साथ कारीगर, सेल्समैन, पॉलिशिंग वर्कर, पैकिंग स्टाफ और कई छोटे व्यवसाय जुड़े होते हैं। ऐसे में कारोबार में गिरावट का असर पूरे इकोसिस्टम पर पड़ेगा।

सरकार से राहत पैकेज और टैक्स छूट की मांग

ज्वेलर्स का कहना है कि अगर सरकार लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील कर रही है, तो व्यापारियों के नुकसान की भरपाई के लिए भी कोई व्यवस्था होनी चाहिए। व्यापारियों ने मांग की है कि इस दौरान टैक्स में राहत, बिजली बिल में छूट और छोटे व्यापारियों के लिए आर्थिक सहायता जैसे कदम उठाए जाएं।

व्यापारियों का कहना है कि दुकान का किराया, कर्मचारियों की सैलरी, बिजली बिल, टैक्स और परिवार के खर्च लगातार चलते रहते हैं। ऐसे में अगर बिक्री कम होती है तो छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए कारोबार संभालना मुश्किल हो जाएगा।

स्थानीय सर्राफा व्यापारियों का भी मिला-जुला रुख

जब हमने स्थानीय सर्राफा व्यापारियों और सोनारों से बात की तो उनकी प्रतिक्रिया भी मिली-जुली देखने को मिली। कुछ व्यापारियों ने प्रधानमंत्री की अपील को देशहित में जरूरी बताया और कहा कि अगर इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है तो वे कुछ समय तक नुकसान सहने के लिए भी तैयार हैं।

वहीं कई सोनारों ने चिंता जताई कि गोल्ड खरीदारी रुकने से सबसे ज्यादा असर छोटे दुकानदारों और कारीगरों पर पड़ेगा। उनका कहना था कि भारतीय समाज में सोना सिर्फ निवेश नहीं बल्कि संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है, इसलिए इसकी मांग पूरी तरह खत्म होना संभव नहीं है।

कुछ स्थानीय व्यापारियों ने कहा कि लोग फिलहाल जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी करेंगे, खासकर शादी-विवाह और त्योहारों में। वहीं कुछ व्यापारियों का मानना है कि प्रधानमंत्री की अपील का मनोवैज्ञानिक असर जरूर पड़ेगा और लोग फिलहाल बड़े निवेश से बच सकते हैं।

देशहित और व्यापार के बीच संतुलन की जरूरत

प्रधानमंत्री मोदी की यह अपील एक तरफ देश की आर्थिक स्थिरता और विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिश मानी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़े व्यापार को लेकर चिंता भी बढ़ गई है।

सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि वे देशहित के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन किसी एक सेक्टर पर इतना बड़ा असर डालने वाले फैसले के साथ राहत और समर्थन की व्यवस्था भी जरूरी है। फिलहाल बाजार में ग्राहकों और व्यापारियों दोनों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है और आने वाले समय में इसका असर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।

नवीनतम अपडेट और रोमांचक कहानियों के लिए हमें ट्विटर, गूगल न्यूज और इंस्टाग्राम पर फॉलो करें और फेसबुक पर हमें लाइक करें।

Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button