समुद्र में डीजल तस्करी का खुलासा: मुंबई पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 9,700 लीटर डीज़ल जब्त, 10 आरोपी गिरफ्तार

मुंबई पुलिस ने अवैध डीज़ल तस्करी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। यह कार्रवाई यलोगेट पुलिस स्टेशन की टीम ने भाऊचा धक्का के पास न्यू फिश जेट्टी के सामने, अरब सागर में लगभग 800 मीटर की दूरी पर की। इस ऑपरेशन में पुलिस ने दो बार्ज — Shri Anant Laxmi (PNJ 430) और M.T. Pranay (BDR-IV-00094) — से कुल 9,700 लीटर अवैध डीज़ल जब्त किया, जिसकी कीमत लगभग 8.73 लाख रुपये है। बरामद उपकरणों और अन्य सामग्री को मिलाकर कुल जब्ती की अनुमानित कीमत करीब 4 करोड़ 59 लाख रुपये बताई जा रही है।
शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई
यह ऑपरेशन पुलिस विभाग में कार्यरत सिकंदर अनंत डोलकर की शिकायत पर शुरू हुआ। जांच में सामने आया कि आरोपी समुद्री मार्ग से चोरी का डीज़ल इकट्ठा करते थे और फिर उसकी तस्करी की जाती थी।
पुलिस ने मौके से:
- पुराने बार्ज
- मोटर पंप
- पाइप
- और 300 लीटर अतिरिक्त डीज़ल भी बरामद किया।
यह कार्रवाई मुंबई पुलिस की समुद्री सुरक्षा और इंटेलिजेंस नेटवर्क की बड़ी सफलता मानी जा रही है।
10 आरोपी गिरफ्तार, 3 अब भी फरार
इस मामले में पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ्तार किया है।
ये आरोपी:
- रत्नागिरी
- कानपुर
- जयपुर
- बिहार
- उत्तर प्रदेश और मुंबई
से ताल्लुक रखते हैं। गिरफ्तार व्यक्तियों में बार्ज मास्टर, चालक, सीमैन और हेल्पर समेत कई कर्मचारी शामिल हैं।
वहीं, तीन लोग अब भी फरार हैं:
- प्रदीप पंडित (सुपरवाइज़र, श्रीकृष्ण ग्रुप कंपनी)
- विशाल (कंपनी का मालिक)
- गंगाराम कोंडीबा इंगळे (बार्ज M.T. Pranay का मालिक)
पुलिस उनकी खोज में छापेमारी कर रही है।
सुरक्षा नियमों की खुलकर अनदेखी
जांच में यह भी सामने आया है कि:
- आरोपी बड़े पैमाने पर चोरी किया हुआ डीजल खरीदते थे
- समुद्र में बिना अनुमति ट्रांसपोर्ट किया जाता था
- ज्वलनशील पदार्थ की हैंडलिंग में कोई सुरक्षा मानक नहीं अपनाया गया
यह न केवल गैरकानूनी है बल्कि मानव जीवन और समुद्री सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।
इन धाराओं में पुलिस ने मामला दर्ज किया है:
- भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 287, 3(5), 61
- अत्यावश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3, 4, 5, 7
- मोटर स्पिरिट व हाई-स्पीड डीज़ल ऑर्डर 1988
के तहत।
निष्कर्ष
मुंबई पुलिस की समय रहते की गई कार्रवाई ने न केवल एक बड़े तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, बल्कि एक संभावित बड़े हादसे को भी टाल दिया। पुलिस अब इस रैकेट के अन्य सहयोगियों, सप्लाई लाइन और मनी नेटवर्क की जांच में जुटी है।
यह पूरा मामला फिर एक बार यह सवाल उठाता है कि समुद्री तस्करी और अवैध तेल कारोबार को रोकने के लिए निगरानी और सख्ती में और बढ़ोतरी की जरूरत है।
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