भारत का नया अंतरिक्ष युग: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में, बने पहले भारतीय जो पहुंचेगे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन

केप कैनावेरल की रात भारत के लिए एक नई सुबह बन गई जब अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर से फ़ॉल्कन-9 रॉकेट ने गुरुवार को भारतीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे (2:31am ET) सफलतापूर्वक उड़ान भरी। इस रॉकेट के अंदर मौजूद ‘ड्रैगन’ कैप्सूल ‘ग्रेस’ की पायलट सीट पर भारत के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला सवार थे।
अंतरिक्ष में पहुंचने के कुछ ही मिनटों बाद, शुक्ला ने ज़मीन से संपर्क कर देशवासियों को संदेश दिया:
“नमस्कार, मेरे प्यारे देशवासियों। क्या सवारी थी! हम अब 7.5 किमी प्रति सेकंड (27,000 किमी प्रति घंटा) की रफ्तार से पृथ्वी की कक्षा में परिक्रमा कर रहे हैं।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक मिशन पर बधाई देते हुए कहा कि शुक्ला “अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुंचने वाले पहले भारतीय बनने की ओर अग्रसर हैं।”
41 वर्षों बाद भारत का दूसरा अंतरिक्ष यान मिशन
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला 1984 में सोवियत संघ के सायूज टी-11 यान में गए विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद ‘कार्मन लाइन’ को पार करने वाले पहले भारतीय हैं। उनका संदेश, “यह सिर्फ मेरे लिए ISS की यात्रा की शुरुआत नहीं है, बल्कि भारत के मानव अंतरिक्ष अभियान की शुरुआत है,” भारत की भविष्य की अंतरिक्ष योजनाओं को दर्शाता है — जिसमें 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना और चंद्रमा व उससे आगे मानव मिशन भेजना शामिल है।
Ax-4 मिशन: अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रतीक
Axiom-4 मिशन बुधवार को लॉन्च हुआ जिसमें कुल चार अंतरिक्ष यात्री सवार हैं:
- कमांडर: पैगी व्हिटसन (संयुक्त राज्य अमेरिका), 65 वर्ष
- पायलट: शुभांशु शुक्ला (भारत), 39 वर्ष
- मिशन विशेषज्ञ: स्लावोश उज़्नांस्की (पोलैंड), 41 वर्ष
- मिशन विशेषज्ञ: टिबोर कापू (हंगरी), 34 वर्ष
लॉन्च से पहले ‘क्रू हैंडओवर’ समारोह हुआ, जिसमें चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने अपने परिवारों को विदा कहा और टेस्ला में बैठकर लॉन्चपैड की ओर रवाना हुए। ड्रैगन कैप्सूल में अंतिम चेक के बाद, लॉन्च के 9 मिनट 38 सेकंड बाद कैप्सूल ‘ग्रेस’ फ़ॉल्कन-9 से अलग हो गया और पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश कर गया।
‘ग्रेस’ की अंतरिक्ष यात्रा
कैप्सूल ‘ग्रेस’ हर 90 मिनट में पृथ्वी की एक परिक्रमा कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की ओर अपने सटीक ऑर्बिटल पथ पर बढ़ रहा है। अगले 24-28 घंटों में, यह कई बार अपने थ्रस्टर जलाएगा ताकि कक्षा को ठीक करते हुए ISS के साथ पूर्ण सामंजस्य बना सके।
हर छोटे-से-छोटे बदलाव को onboard कंप्यूटर, GPS, रडार और सेंसर की मदद से ट्रैक किया जा रहा है। गुरुवार शाम 4:30 बजे IST पर डॉकिंग निर्धारित है।
डॉकिंग की प्रक्रिया
जब ‘ग्रेस’ ISS के 400 मीटर के दायरे में पहुंचेगा, तब से यह रुक-रुक कर आगे बढ़ेगा। हर ‘वेपॉइंट’ पर डेटा जांचा जाएगा। आखिरी 20 मीटर की दूरी पर लेज़र और कैमरे सक्रिय होंगे। कैप्सूल बहुत ही धीमी गति (सेंटीमीटर प्रति सेकंड) से ‘हार्मनी मॉड्यूल’ के डॉकिंग पोर्ट की ओर बढ़ेगा।
‘सॉफ्ट कैप्चर’ के दौरान मैग्नेटिक गाइड्स कैप्सूल को खींचकर पोर्ट से जोड़ते हैं। इसके बाद ‘हार्ड कैप्चर’ होता है, जिसमें मैकेनिकल लॉकिंग के ज़रिए कनेक्शन पूरी तरह सील हो जाता है। उसके बाद प्रेशर और लीकेज जांच के बाद ही हैच खोला जाएगा और अंतरिक्ष यात्री स्टेशन में प्रवेश करेंगे।
मिशन की मासूम साथी: ‘जॉय’
इस अंतरिक्ष यात्रा का एक नन्हा सदस्य भी है — एक सफेद, नरम हंस का खिलौना ‘जॉय’, जो ‘जीरो ग्रैविटी इंडिकेटर’ के रूप में काम कर रहा है। ‘जॉय’ को शुभांशु शुक्ला के छह साल के बेटे कियाश (पुकार नाम: सिड) की पसंद को ध्यान में रखते हुए चुना गया।
मिशन विशेषज्ञ टिबोर कापू ने बताया,
“हमारे पहले सभी आइडिया जानवरों पर आधारित थे। शुक्स का बेटा सिड जानवरों से बेहद प्यार करता है — पहले डायनासोर और शेर की सोच थी, लेकिन उपयुक्त विकल्प नहीं मिला। फिर हमें ‘जॉय’ मिला और हम बेहद खुश हुए।”
भारत के लिए यह मिशन सिर्फ एक अंतरिक्ष यात्रा नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में आत्मनिर्भरता और वैश्विक सहयोग की दिशा में बढ़ा एक ऐतिहासिक कदम है। ग्रुप कैप्टन शुक्ला न केवल अंतरिक्ष की ऊँचाइयों को छू रहे हैं, बल्कि भारत के भविष्य के अंतरिक्ष स्वप्न को भी साकार कर रहे हैं।
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