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ईरान-इज़रायल युद्ध का चौथा दिन: भारत ने शुरू की फंसे नागरिकों और छात्रों की निकासी, पहला जत्था पहुंचा आर्मेनिया

ईरान और इज़रायल के बीच छिड़ा युद्ध अब चौथे दिन में प्रवेश कर चुका है। लगातार हो रही बमबारी और बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा और साहसिक कदम उठाया है। भारत ने ईरान में फंसे अपने नागरिकों और छात्रों की सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस फैसले से हजारों भारतीयों को राहत मिली है, जो युद्धग्रस्त इलाकों में फंसे हुए थे।

भारत ने शुरू की निकासी प्रक्रिया, पहला जत्था सुरक्षित सीमा पार
ABP न्यूज़ के आर्टिकल के अनुसार, मंगलवार रात भारतीय नागरिकों का पहला जत्था ईरान से आर्मेनिया सीमा पार पहुंच गया। इस समूह में करीब 110 लोग शामिल थे। यह निकासी भारत सरकार और ईरानी प्रशासन के बीच उच्च स्तरीय बातचीत के बाद संभव हो पाई।

भारत ने पहले ही ईरान से 10,000 से अधिक भारतीय छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए औपचारिक मदद मांगी थी। ईरान ने जवाब में कहा कि उसका हवाई क्षेत्र बंद है, इसलिए भारतीय नागरिकों को ज़मीनी रास्तों से अज़रबैजान, तुर्कमेनिस्तान और अफगानिस्तान की ओर भेजा जा सकता है।

छात्रों के लिए विशेष बसों की व्यवस्था
सोमवार को तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने छात्रों को निकालने के लिए विशेष बसों की व्यवस्था की। इन बसों के जरिए तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, इस्लामिक आजाद यूनिवर्सिटी, और ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज से छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के छात्रों को विशेष रूप से सुबह 10 बजे वेलेंजक विश्वविद्यालय के गेट नंबर 2 से कोम शहर के लिए रवाना किया गया। उधर उर्मिया यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज से छात्रों की निकासी भी जारी है। वहीं शिराज यूनिवर्सिटी और इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के संपर्क में भी दूतावास लगातार बना हुआ है और इन संस्थानों से छात्रों को मंगलवार सुबह निकाला गया।

दूतावास की एडवाइजरी: सतर्क रहें, संपर्क में रहें
15 जून को भारतीय दूतावास ने एक आधिकारिक एडवाइजरी जारी की, जिसमें सभी भारतीय नागरिकों और प्रवासी भारतीयों से अनुरोध किया गया कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें और दूतावास से संपर्क में बने रहें। दूतावास ने यह भी कहा कि वे सुरक्षा हालात पर नजर बनाए हुए है और सभी छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।

ईरान की अमेरिका को चेतावनी: अगला जवाब और कठोर होगा
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने सोमवार को ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारीक से टेलीफोन पर बातचीत में कहा कि यदि अमेरिका ने इज़रायल को रोका नहीं, तो ईरान की अगली प्रतिक्रिया और भी “पीड़ा देने वाली” होगी।

राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने कहा, “हमने पहले भी दिखाया है कि हम तेजी से और सटीक जवाब देने में सक्षम हैं। यदि फिर से ऐसा हुआ, तो हमारा जवाब और कठोर और निर्णायक होगा।”

निष्कर्ष
भारत सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दर्शाता है कि संकट के समय भारत अपने नागरिकों को अकेला नहीं छोड़ता। ईरान और इज़रायल के बीच युद्ध के तेज़ होते हालात में भारतीय दूतावास, सरकार और सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता एक बड़ी राहत बनकर सामने आई है।

हालांकि अभी भी हजारों भारतीय वहां फंसे हुए हैं, लेकिन निकासी की प्रक्रिया जारी है और उम्मीद की जा रही है कि सभी नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश लाया जाएगा। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब ईरान और अमेरिका के बीच बनते हालात पर भी टिकी हुई है।

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