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उत्तर भारत में ठंड और कोहरे से रेल यातायात प्रभावित, यात्रियों को हो रही भारी परेशानी

उत्तर भारत में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है, और घने कोहरे ने रेल यातायात को बुरी तरह प्रभावित किया है। कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन, जहां से रोजाना करीब 200 ट्रेनें गुजरती हैं, वहां हजारों यात्री घंटों तक अपनी ट्रेन के इंतजार में ठिठुरते देखे गए। यात्री केवल कुछ मिनटों का नहीं बल्कि 7-7 घंटे तक का इंतजार कर रहे हैं।

घोषणाओं के बावजूद ट्रेनों की लेटलतीफी जारी
कुछ समय पहले रेलवे अधिकारियों ने दावा किया था कि कोहरे के बावजूद ट्रेनों की रफ्तार में कमी नहीं आएगी। अधिकारियों के अनुसार, ट्रेनों में एंटी-फॉग शीशों और जीपीएस सिस्टम का प्रावधान किया गया है, जो लोको पायलट को सिग्नल और ट्रैक की स्थिति की स्पष्ट जानकारी देगा। इस तकनीक के जरिए कोहरे के कारण होने वाली दृश्यता की समस्या को खत्म करने के दावे किए गए थे।

हालांकि, हकीकत में स्थिति विपरीत दिख रही है। यात्रियों को घंटों तक प्लेटफार्म पर ठंड में ट्रेन का इंतजार करना पड़ रहा है। ट्रेनों की देरी ने यात्रियों को परेशानी में डाल दिया है, और उन्हें प्लेटफार्म पर ही अपने समय काटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

रेल अधिकारियों की प्रतिक्रिया
कानपुर सेंट्रल के चीफ ट्रैफिक मैनेजर आशुतोष सिंह ने ट्रेनों की लेटलतीफी को लेकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके पास ट्रेनों की देरी का सटीक डेटा नहीं है, लेकिन घने कोहरे के कारण गाड़ियों की गति नियंत्रित की गई है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ ट्रेनों में एंटी-फॉग शीशों की व्यवस्था नहीं है।

उन्होंने बताया कि ट्रेनों में पानी और साफ-सफाई की समस्या को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए नामांकित स्टेशनों पर विशेष व्यवस्था की गई है ताकि यात्रियों को सुविधा मिल सके।

घने कोहरे के कारण देरी का मुख्य कारण
कोहरे के कारण ट्रेनों की दृश्यता प्रभावित होती है, जिससे लोको पायलटों को सिग्नल और ट्रैक की स्पष्टता नहीं मिल पाती। हालांकि, एंटी-फॉग सिस्टम और जीपीएस तकनीक इस समस्या को दूर करने के उद्देश्य से लगाए गए थे, लेकिन इनका पूर्ण प्रभाव नहीं दिख रहा है।

यात्रियों की परेशानी बढ़ी
यात्रियों का कहना है कि ठंड और कोहरे के कारण ट्रेनें घंटों देरी से चल रही हैं। प्लेटफार्म पर ठंड में इंतजार करना यात्री के लिए बेहद मुश्किल हो गया है। 7 घंटे से ट्रेन का इंतजार कर रहे एक यात्री ने बताया कि ठंड में इंतजार करना बेहद कठिन है, और रेलवे की व्यवस्थाएं इस मामले में पूरी तरह नाकाफी साबित हो रही हैं।

निष्कर्ष
कोहरे और ठंड ने उत्तर भारत में रेल यातायात को बुरी तरह प्रभावित किया है। रेलवे प्रशासन को तत्काल प्रभाव से यात्रियों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। तकनीकी सुधारों के बावजूद, व्यावहारिकता में सुधार की सख्त जरूरत है ताकि यात्रियों को इस ठंड में राहत मिल सके।

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