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नवजात जुड़वां बच्चियों की हत्या का मामला, पति और परिवार पर हत्या और साजिश का आरोप

दिल्ली के सुल्तानपुरी में नवजात जुड़वां बच्चियों की हत्या और उन्हें दफनाने के मामले में एक व्यक्ति और उसके परिवार के चार अन्य सदस्यों को साजिश रचकर हत्या करने और साक्ष्य छिपाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस द्वारा तैयार की गई 800 पन्नों की चार्जशीट में आरोपियों के खिलाफ हत्या, भ्रूण हत्या, नवजात हत्या, समान इरादे और दहेज से जुड़े कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

क्या है मामला?
यह मामला जून 2024 में सामने आया था। आरोपी नीरज सोलंकी (30), उसके माता-पिता विजेंदर सोलंकी (60) और चंद कौर (56), भाई दिनेश (32) और भाभी मोनिका (37) को इस जघन्य अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। पुलिस के अनुसार, 1 जून को नीरज और उसके परिवार ने नवजात जुड़वां बच्चियों की हत्या कर उन्हें सुल्तानपुरी में दफना दिया।

नीरज की पत्नी पूजा, जो बीएससी ग्रेजुएट हैं, ने 30 मई को रोहतक सेक्टर 36 के एक अस्पताल में जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया था। पुलिस ने बताया कि नीरज और उसके परिवार को बच्चियों के जन्म से नाराज़गी थी। जब पूजा अस्पताल से छुट्टी लेकर अपने माता-पिता के घर इस्माइला (रोहतक) जाने के लिए तैयार हुई, तो नीरज और उसके परिवार ने बच्चियों को साथ ले जाने के बहाने रास्ता बदलकर सुल्तानपुरी में उनकी हत्या कर दी।

हत्या और साजिश: चार्जशीट के खुलासे
पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट के अनुसार, यह हत्या पूर्वनियोजित और सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी। परिवार ने नवजात बच्चियों को जरूरी पोषण और चिकित्सा सुविधा से वंचित रखा और उनकी हत्या के बाद उन्हें दफनाकर सबूत मिटाने की कोशिश की। चार्जशीट में कहा गया है कि:

  • नीरज सोलंकी: मुख्य आरोपी है, जिसने बच्चियों की हत्या की और उनकी मां को बिना बताए उन्हें दफना दिया।
  • विजेंदर सोलंकी (नीरज के पिता): हत्या में सहयोगी और बच्चियों को दफनाने में मददगार।
  • चंद कौर (नीरज की मां): नवजात बच्चियों को बेटे के हवाले किया, जिससे हत्या संभव हो पाई।
  • दिनेश और मोनिका (नीरज के भाई और भाभी): हत्या की साजिश में शामिल।

दहेज और बेटा पाने का दबाव
पूजा ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था। 2 फरवरी 2022 को हुई इस शादी के बाद से ही नीरज का परिवार बेटे की चाहत को लेकर पूजा पर दबाव बना रहा था। पूजा ने खुलासा किया कि गर्भावस्था के दौरान परिवार ने उससे लिंग परीक्षण कराने की मांग की थी, जिसे उसने मना कर दिया।

पूजा का संघर्ष और न्याय की गुहार
पूजा ने पुलिस को बताया कि बच्चियों के जन्म के बाद नीरज और उसके परिवार ने उनकी पूरी तरह से अनदेखी की। न तो बच्चियों को कोई चिकित्सा सुविधा दी गई और न ही उनकी देखभाल की गई। जब पूजा को उनकी मौत और दफनाने की सच्चाई का पता चला, तो उसने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

आरोपियों की न्यायिक हिरासत
पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें रोहिणी कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

न्याय की उम्मीद
पूजा ने अपने बयान में कहा कि वह अपनी मासूम बच्चियों के लिए न्याय चाहती हैं। इस हृदयविदारक मामले ने समाज को झकझोर कर रख दिया है और एक बार फिर बेटियों के प्रति रूढ़िवादी मानसिकता और दहेज प्रथा की कुप्रथाओं को उजागर किया है।

सरकार और समाज के लिए यह मामला महिला सशक्तिकरण और बेटियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

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