अमेठी में विधवा महिला की जमीन हड़पने का मामला: मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटे के नाम पर हुआ धोखाधड़ी से बैनामा, BJP नेता पर गंभीर आरोप
उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले से एक चौंकाने वाला और दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां एक विधवा और गरीब महिला कमला देवी की करीब 80 लाख रुपये मूल्य की जमीन को कथित रूप से मात्र 90 हजार रुपये में हड़प लिया गया। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह रकम भी पीड़ित को नहीं मिली। इस मामले में BJP नेता और व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष महेश सोनी का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है।
मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटे के नाम से करवा लिया बैनामा
यह घटना अमेठी कोतवाली क्षेत्र के मुराई का पुरवा, जंगल रामनगर गांव की है, जहां की निवासी कमला देवी पहले ही अपने पति और तीन बेटों को खो चुकी हैं। अब उनका एकमात्र बेटा जंगजीत, जो मानसिक रूप से अस्वस्थ है, उनका सहारा है। कमला देवी का आरोप है कि 16 नवंबर 2024 को राकेश पासी की पत्नी श्यामरती ने उनके बेटे से धोखे से जमीन का बैनामा करवा लिया। इस जमीन की बाजार में 80 लाख रुपये कीमत है, लेकिन इसे मात्र 90 हजार रुपये में खरीदा दिखाया गया।
कमला देवी ने बताया कि उनके बेटे को यह भी नहीं पता कि बैनामा क्या होता है। सौदे में उसे 90 हजार में से 40 हजार रुपये मौके पर ही वापस ले लिए गए, और बाकी 50 हजार रुपये राकेश और शेखर ने आपस में बाँट लिए। बाद में, 18 नवंबर 2024 को जमीन का आधा हिस्सा कंचन (पत्नी चंद्रशेखर) के नाम भी बैनामा कर दिया गया, वो भी बिना कोई वैध दस्तावेजी प्रक्रिया के।
BJP नेता महेश सोनी पर गहरा संदेह
इस पूरी धोखाधड़ी में सबसे गंभीर आरोप BJP नेता महेश सोनी पर लगे हैं। जमीन सौदे में शामिल राकेश पासी ने खुद माना कि उसने महेश सोनी के कहने पर यह सौदा किया था। राकेश का कहना है कि शेखर बड़ा भूमाफिया है और उसे पुलिस व गुंडों ने इस कदर परेशान किया कि वह दुकान तक नहीं खोल सका। पुलिस ने उससे 1 लाख रुपये की मांग की थी। थक-हारकर उसने महेश सोनी के दबाव में एक बिस्वा ज़मीन कंचन के नाम कर दी।
महेश सोनी ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि
“कुछ लोग मेरी बढ़ती लोकप्रियता से परेशान हैं और मेरी छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।”
लेकिन 29 मई 2025 को हुए एक बैंक ट्रांजैक्शन से मामला संदिग्ध नजर आता है, जहां श्यामरती के खाते में “महेश सोनी कंस्ट्रक्शन” के नाम से 4 लाख रुपये NEFT के माध्यम से भेजे गए। यह लेन-देन महेश सोनी की सक्रिय भूमिका की ओर इशारा करता है।
पीड़िता की गुहार: “मुझे पैसा नहीं, मेरी ज़मीन चाहिए”
कमला देवी ने भावुक होकर बताया,
“मेरे पास इस जमीन के सिवा कुछ नहीं है। जब मैंने इसका विरोध किया तो मुझे जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस को 112 पर कॉल किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।”
उन्होंने संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी (DM) से मुलाकात कर अपनी ज़मीन वापस दिलाने की मांग की और कहा:
“मुझे पैसा नहीं चाहिए, बस मेरी ज़मीन वापस मिल जाए।”
कमला देवी का यह बयान इस बात की गवाही देता है कि एक गरीब महिला किस तरह से व्यवस्था और सत्ता के गठजोड़ की भेंट चढ़ जाती है।
प्रशासन का रुख: जांच के बाद कार्रवाई
एसडीएम आशीष कुमार सिंह ने बताया कि
“शिकायत की जांच कोतवाली अमेठी के प्रभारी निरीक्षक को सौंपी गई है और रिपोर्ट आने के बाद उचित विधिक कार्रवाई की जाएगी।”
निष्कर्ष: एक महिला की पुकार, क्या मिलेगा न्याय?
कमला देवी की कहानी न सिर्फ अमेठी, बल्कि पूरे देश के भूमाफिया और राजनीतिक गठजोड़ की सच्चाई को उजागर करती है। सवाल यह है कि क्या इस मामले में पीड़िता को न्याय मिलेगा? क्या ज़मीन हड़पने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी? और क्या राजनीतिक दबाव के बीच सच्चाई बाहर आ पाएगी?
Source : ABP News
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