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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तनाव के बीच भारत का बड़ा कदम, रूसी तेल आपूर्ति सुरक्षित करने की तैयारी

नई दिल्ली: भारत ने वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंकाओं के बीच एक अहम और रणनीतिक फैसला लिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी टकराव के चलते तेल और गैस की आपूर्ति पर खतरे को देखते हुए भारत ने रूसी तेल के आयात को सुरक्षित करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

बीमा कंपनियों की संख्या बढ़ाई

सरकार ने रूसी तेल लाने वाले जहाजों के लिए बीमा देने वाली रूसी कंपनियों की संख्या 8 से बढ़ाकर 11 कर दी है। यह निर्णय डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) द्वारा लिया गया है।

ये कंपनियां जहाजों को ‘P&I कवर’ (Protection and Indemnity Insurance) प्रदान करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री संचालन के लिए अनिवार्य होता है।

प्रतिबंधों के बीच भारत का समाधान

पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण यूरोपीय बीमा कंपनियों ने रूसी तेल ढोने वाले जहाजों को बीमा देना कम कर दिया था। इससे भारत जैसे बड़े आयातक देश के सामने चुनौती खड़ी हो गई थी।

भारत ने इस समस्या का समाधान निकालते हुए रूसी बीमा कंपनियों को मंजूरी दी, जिससे तेल आपूर्ति में बाधा न आए।

किन कंपनियों को मिली अनुमति

दुनिया की प्रमुख रूसी कंपनियों जैसे गज़प्रोम इंश्योरेंस और रोसगोस्त्राख को फरवरी 2027 तक सेवाएं देने की अनुमति दी गई है।

वहीं VSK, सोगाज़ और अल्फास्ट्राखोवानी को 2030 तक की मंजूरी दी गई है।

इसके अलावा दुबई स्थित इस्लामिक प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी क्लब को भी फरवरी 2027 तक सेवाएं देने की अनुमति दी गई है, जिससे विकल्प बढ़ सकें और निर्भरता कम हो।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल सप्लाई होती है। यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है फैसला

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और हाल के वर्षों में उसने रूस से सस्ता तेल खरीदना बढ़ाया है। ऐसे में यह जरूरी था कि तेल की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रहे।

यह फैसला एक तरह से ‘सुरक्षा कवच’ की तरह काम करेगा, जिससे भारत की ऊर्जा जरूरतें प्रभावित नहीं होंगी।

निष्कर्ष

वैश्विक तनाव के बीच भारत का यह कदम दूरदर्शी रणनीति का उदाहरण है। रूसी बीमा कंपनियों को मंजूरी देकर भारत ने न सिर्फ मौजूदा संकट का समाधान निकाला है, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए भी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है।

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