HINDI NEWSवर्ल्ड

भारत के साथ चीन जैसी गलती नहीं दोहराएगा अमेरिका: रायसीना डायलॉग में बोले क्रिस्टोफर लैंडाउ

क्रिस्टोफर लैंडाउ ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर साफ कहा है कि अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रखेगा और चीन के साथ दो दशक पहले हुई गलतियों को दोहराने नहीं देगा।

नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग  2026 के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापारिक सहयोग तो चाहता है, लेकिन वह यह सुनिश्चित करेगा कि समझौता संतुलित और दोनों देशों के लिए लाभकारी हो।

“भारत के साथ चीन वाली गलती नहीं करेंगे”

लैंडाउ ने कहा कि लगभग 20 साल पहले अमेरिका ने चीन के साथ व्यापारिक संबंधों में अपने बाजार खोल दिए थे और बाद में कई क्षेत्रों में चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़ दिया।

उन्होंने कहा, “भारत को समझना चाहिए कि हम भारत के साथ वही गलती नहीं करेंगे जो हमने चीन के साथ की थी, जब हमने बाजार खोल दिए और बाद में चीन कई व्यावसायिक क्षेत्रों में हमसे आगे निकल गया।”

‘अमेरिका फर्स्ट’ का मतलब अमेरिका अकेला नहीं

लैंडाउ ने अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीति पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका दुनिया से अलग हो जाएगा, बल्कि इसका अर्थ यह है कि हर समझौता अमेरिकी हितों को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जैसे डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका को फिर से महान बनाना चाहते हैं, वैसे ही दुनिया के अन्य नेता भी अपने देशों के हितों को प्राथमिकता देते हैं और यह स्वाभाविक है।

व्यापार समझौता अंतिम चरण में

लैंडाउ ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

उनके अनुसार यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई गति दे सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस समझौते को लेकर काफी उत्साहित है और इसे जल्द अंतिम रूप देने की उम्मीद है।

भारत के उभार पर भी जताया भरोसा

लैंडाउ ने कहा कि 21वीं सदी में भारत का प्रभाव तेजी से बढ़ेगा, क्योंकि यह दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है और आर्थिक रूप से भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका साझेदारी कोई दान या सामाजिक कार्य नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के हितों पर आधारित रणनीतिक सहयोग है।

अन्य मुद्दों पर भी हुई चर्चा

रायसीना संवाद के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए लैंडाउ ने भारतीय अधिकारियों के साथ रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिज, नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी बातचीत की।

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और होरमुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिका भारत के लिए ऊर्जा का एक भरोसेमंद स्रोत बन सकता है।

हालांकि अमेरिका ने साफ कर दिया है कि प्रस्तावित व्यापार समझौता पूरी तरह संतुलित और पारस्परिक होगा, ताकि किसी एक देश को अनुचित लाभ न मिले।

नवीनतम अपडेट और रोमांचक कहानियों के लिए हमें ट्विटर, गूगल न्यूज और इंस्टाग्राम पर फॉलो करें और फेसबुक पर हमें लाइक करें।

Show More

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button